Sunday, October 9, 2011

अर्ज़ किया है...

My roommate wrote something and I responded back. Its funny how different people think. 

‎Roomie : 

तुम बेसहारा हो तो किसीका सहारा बनो,
तुमको अपने आप ही सहारा मिल जायेगा,
डूबती हुई कश्ती को पहुंचा दो किनारे पे,
तुमको अपने आप ही किनारा मिल जायेगा |

me : 

किनारे पे पहुचते ही लोग बिखर जायेंगे,
और तुम फिर से बेसहारा हो जाओगे,
पर जिन्दगीका येही दस्तूर है मेरे भाई,
चाहे हो वो ज़मीन या समंदर की गहराई |

Roomie : 

बेसहारा होके तुम अपनी आंकें चल्कोगे,
पल पल अपने आप में खो जाओगे,
कुछ न हुआ तो अपने आपको कोसोगे,
फिर भी उन लम्हों में हम याद करोगे |

me: 

अपने आप में खोने में क्या है समझदारी 
उपरवाले की है दुनिया न्यारी,
याद तो तुम्हारी आएगी मेरे यार,
क्या इसको ही कहते है प्यार?



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