Thursday, December 15, 2011

Buffalo Snow...

Gold is put into a furnace,
Just to get its glow...
Isn't it like, to enjoy the fall,
You have to bear the Buffalo snow... :)

Sunday, October 9, 2011

अर्ज़ किया है...

My roommate wrote something and I responded back. Its funny how different people think. 

‎Roomie : 

तुम बेसहारा हो तो किसीका सहारा बनो,
तुमको अपने आप ही सहारा मिल जायेगा,
डूबती हुई कश्ती को पहुंचा दो किनारे पे,
तुमको अपने आप ही किनारा मिल जायेगा |

me : 

किनारे पे पहुचते ही लोग बिखर जायेंगे,
और तुम फिर से बेसहारा हो जाओगे,
पर जिन्दगीका येही दस्तूर है मेरे भाई,
चाहे हो वो ज़मीन या समंदर की गहराई |

Roomie : 

बेसहारा होके तुम अपनी आंकें चल्कोगे,
पल पल अपने आप में खो जाओगे,
कुछ न हुआ तो अपने आपको कोसोगे,
फिर भी उन लम्हों में हम याद करोगे |

me: 

अपने आप में खोने में क्या है समझदारी 
उपरवाले की है दुनिया न्यारी,
याद तो तुम्हारी आएगी मेरे यार,
क्या इसको ही कहते है प्यार?



वनवास

रामाचा एकदा होता भलताच रोमँिटक मूड,
विसरून गेला होता तहान आणि फूड,
गेला सीतेकडे आणि म्हणला तिला,
लुटेला हाय लुटेला !!!!!!!

सीता व्ह्सकारून गेली अंगावर,
अहो धनी, आता जाता का कामावर????
आलिया भोगासी असावे सादर,
रात्री पांघरायला साधी नाही चादर...

राम बिचारा साधा भोळा,
गेला सामान करायला गोळा,
लक्ष्मणपण होता त्याच्या बरोबर,
बीकॉझ फोर हीम, ही वॅाझ लाईक फादर...

सीता एकटी घरी झाली होती बोर,
म्हणली जरा IPL चा बघते स्कोर,
खवय्ये आणि पाहून मेजवानी,
आता तोंडाला सुटलाय पाणी...

घरी नाही आहे तूप लोणी,
आजूबाजूला आहेत फक्त प्राणी,
कोक स्टुिडओची लावते गाणी,
हीच सध्याची अभंगवाणी...